छोटी कहानी शिक्षा देने वाली | बच्चों को ज्ञान देने Moral वाली कहानी

छोटी कहानी शिक्षा देने वाली – बच्चों को ज्ञान देने वाली कहानी आप अपने जीवन में क्या करना चाहते हो ? और क्या बनना चाहते है ? वो आप पर ही निर्भर करता है। हम आपको ऐसे ही कुछ कहानियों से रूबरू कराएंगे।

अगर बच्चों को moral तरीके की short कहानी आप सुनाओगे या उन्हें पढ़ने को डोज तो उनके मन में उस तरह के ख्याल भी आते है। बस ये देखना होगा की बच्चे पढ़ क्या रहे है। क्युकी बहुत से ऐसे Website है जो गलत तरह से बताती है। और कुछ अच्छे तरह से उदहारण देकर, आप इन छोटी कहानी शिक्षा देने वाली कहानियों को जरूर पढ़े और अपने बच्चों को भी सुनाये।

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छोटी कहानी शिक्षा देने वाली

Moral Story – बच्चों को ज्ञान देने वाली कहानी को यहाँ से शुरू करते है यहाँ पे आपको 3 moral kahani पढ़ने को मिलेंगी।

Short – घमंडी बारासिंघा की कहानी

एक समय की बात है, एक घना जंगल में एक बारहसिंगा रहा करता था | जो की बहुत ज्यादा घमंडी था | एक बार वह तालाब के किनारे पानी पी रहा था, और अचानक उसे वहां पर पानी में अपनी परछाई दिखाई पड़ी |

और वह अपने सुंदर से सिखों को देखकर इतराने लगा, और खुश होने लगा और वही अपनी पतली टांगों को देखकर उन्हें कोसने लगा | गालियां देने लगा और भगवान से कहने लगा कि हे भगवान आपने मेरी सिंह इतनी सुंदर दी है | और पैर इतने बदसूरत |

कुछ समय बाद जब वह एक दिन जंगल में घूम रहा था तब वहां कुछ शिकारी कुत्ते जंगल में आ जाते हैं | और वह बारहसिंगा के पीछे पड़ जाते हैं यह देखकर वह घबराकर दूर भाग गया | उसके पतली टांगे ही उसके भागने में सहायता कर रही थी |

जिससे वह कोस रहा था | भागते-भागते अचानक उसके सिंह झाड़ियां के बीच में फंस जाते हैं | और उसने अपनी सिंह को झाड़ियां से निकालने का बहुत प्रयास किया परंतु वह उसमें नाकाम रहा इसके पश्चात उन शिकारी कुत्तों ने उसे घायल कर दिया | 

और वह मरने  की हालत में हो गया था | जब वह अपनी आखिरी सांस गिर रहा था तब वह मन में सोचता है | कि सुंदर सिंघों ने मुझे मरवा दिया और मेरी पतली टांगे मुझे बचा सकती थी |

इस कहानी से शिक्षा

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है | की जरूरी नहीं की हर सुंदर चीज आपके बुरे वक्त में आपकी सहायता करें | इसलिए आपको ईश्वर ने जितना दिया है, उसमें संतुष्ट रहे |

Short – दादी की पेंसिल की कहानी

एक दिन रोहन अपने कमरे में उदास बैठा हुआ था | इसका मैथ्स का एग्जाम बहुत ही खराब गया था | और वह इस बात से परेशान था |

कि उसे अब बहुत कम मार्क्स मिलेंगे रोहन की दादी अचानक से उसे आवाज लगती है | और जब रोहन की आवाज सुनाई नहीं देती तब वह उसके कमरे की ओर बढ़ती है |

और रोहन को परेशान देखकर वह उसे एक पेंसिल गिफ्ट में देती है |

तब रोहन परेशान होकर कहता है, की दादी मां आप मुझे यह पेंसिल नहीं दीजिए क्योंकि मेरा तो एग्जाम खराब हुआ है | इसलिए मैं इस गिफ्ट का क्या करूंगा ?

तब दादी मां उसे समझाते हुए यह कहती है कि रोहन बेटा यह पेंसिल भी तुम्हारी तरह ही है | और यह पेंसिल तुम्हें बहुत कुछ सिखाएगी देखो जब हम यह इस पेंसिल को छीलते हैं |

तो इसे भी ऐसे ही दर्द होता है, जैसे कि अभी तुमको हो रहा है | लेकिन जब हम एक बार पेंसिल को छील लेते हैं |

उसके बाद पहले से शार्प और अच्छी हो जाती है, और उससे हम सुंदर हैंडराइटिंग बना सकते हैं | और इस पेंसिल से सबक सीख कर तुम भी इतनी अच्छी मेहनत करो कि तुम पहले से ज्यादा अच्छे और होशियार हो जाओ |

और मैथ्स को अपनी कमजोरी नहीं अपनी ताकत बनाओ |

कहानी से सीख

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है| कि जिस प्रकार पेंसिल को छीलने सेवह हमें सुंदर हैंडराइटिंग देती है | ठीक उसी प्रकार हमारे लगातार प्रयासों से हम अपने जीवन में आए किसी भी समस्या का हल निकाल सकते हैं बिना डरे |

Short – हाथी और दर्जी की कहानी

कुछ सालों पहले रतनपुर नामक गांव में एक मंदिर हुआ करता था | और उस मंदिर का पुजारी रोज पूजा पाठ किया करता | उस पुजारी के पास अपना खुद का एक हाथी था | जिसे वह रोज मंदिर लेकर आता और गांव की सभी लोग हाथी को बहुत पसंद करते थे | 

और हाथी भी मंदिर में आए हुए श्रद्धालुओं का स्वागत सत्कार करता रहता था | पूजा पाठ करने के पश्चात पुजारी अपने हाथी को नहलाने के लिए तालाब की ओर लेकर जाता था | और नहाने के पश्चात हाथी लौटते समय दर्जी की दुकान पर रुकता था | 

और दर्जी भी हाथी को रोज एक केला प्यार से देता था | केला खाने के पश्चात हाथी दरजी को नमस्ते कहकर पुजारी के साथ घर को चला जाता था | यह सब हाथी और पुजारी की रोजमर्रा की जिंदगी का एक हिस्सा हुआ करता था |

एक बार जब हाथी दर्जी की दुकान पर केला खाने के लिए रुका, तो दरजी के मन में कुछ शरारत सूजी उसने हाथी को केला देने के बाद अपने हाथ पर एक नुकीली सुई रख ली |

जैसे ही हाथी ने उसे नमस्ते किया दर्जी ने उसकी शूट पर सुई चुभो दी | और सुई के चुभते ही बेचारा हाथी दर्द से करहांने लगा | और दर्जी ने हाथी के दर्द का खूब मजाक उड़ाया |

और जोर-जोर से हंसने लगा और पुजारी को इस बात का पता नहीं चला कि आखिर हुआ क्या वह हाथी को सहलाते हुए अपने घर को लेकर चला गया | अगले दिन फिर पुजारी और हाथी तालाब से लौटकर आ रहे थे |

तो पुजारी कुछ दूर रुक कर लोगों से बात करने लगा और हाथी रोज की तरह दर्जी की दुकान पर रुक गया | आज हाथी ने अपनी सूड में कीचड़ भर लिया था |

और दर्जी भी अपनी सिलाई कर रहा था, जैसे ही हाथी ने दरजी को देखा वैसे ही हाथी ने उसकी पूरी दुकान पर कीचड़ छिड़क दिया | और उस कीचड़ में दरजी तो भीगा  ही साथ ही उसकी दुकान में टगे सभी कपड़े खराब हो गए |

और कीचड़ से सन गए इस सब चीजों से दरजी यह बात समझ गया, की जो हरकत उसने कल हाथी के साथ की थी उस की सजा उसे हाथी ने आज दी है | तब जाकर दरजी को अपनी गलती का एहसास हुआ और वह हाथी के पास भाग कर गया |

और हाथी से माफी मांगने लगा, और हाथी ने भी  बड़े प्यार से दर्जी की ओर देखा और अपनी सूड को हवा में लहराता हुआ अपने घर को चला गया |

और दर्जी को इस बात का बहुत बुरा लग रहा था | की कि उसने अपने मजाक के कारण अपने सबसे प्यारे दोस्त हाथी को खो दिया | और उस दिन से दर्जी ने ठान लिया कि वह मजाक में भी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाएगा |

कहानी से सीख

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है | की कभी-कभी हमारा किया गया छोटा सा मजाक भी किसी के दर्द का कारण बन सकता है | इसलिए हमें कभी भी किसी के बुरे समय में उसका मजाक नहीं बनना चाहिए |

आशा करता हु दोस्तों आपको छोटी कहानी शिक्षा देने वाली पसंद आई होगी। और बच्चों को ज्ञान देने वाली कहानी आपने अपने Whatsapp और facebook पर भी शेयर कर दिया होगा। साथ ही आपने बच्चों को भी सुनाया होगा।

आपको कोनसी कहानी सबसे ज्यादा अच्छी लगी है हमें एक बार Comments करके जरूर बताये। आपके एक Comments से हमें भी और लिखने का Motivate मिलता है। धन्यवाद

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